School Summer Vacation 2026: राजस्थान में हर साल गर्मी का मौसम काफी कठोर और चुनौतीपूर्ण माना जाता है. अप्रैल से ही तापमान तेजी से बढ़ने लगता है और मई-जून के महीनों में कई इलाकों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुंच जाता है. ऐसी परिस्थितियों में स्कूल जाने वाले छात्रों के लिए रोजाना स्कूल जाना काफी कठिन हो जाता है. कई बार तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है. इसी कारण हर साल राज्य सरकार गर्मियों के मौसम में स्कूलों के लिए विशेष अवकाश घोषित करती है ताकि छात्रों को भीषण गर्मी से राहत मिल सके.
मौसम विभाग ने जारी किया हीटवेव अलर्ट
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में राजस्थान के कई जिलों में हीटवेव यानी लू चलने की संभावना है. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार गर्मी का असर पहले से ज्यादा देखने को मिल सकता है. खासकर पश्चिमी राजस्थान के जिलों जैसे जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर और बाड़मेर में तापमान काफी अधिक रहने की संभावना जताई गई है. इसी वजह से बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पहले से ही गर्मी की छुट्टियों का ऐलान कर दिया है.
राजस्थान में कब से शुरू होंगी गर्मी की छुट्टियां
राजस्थान के स्कूली छात्रों के लिए यह खबर राहत भरी है. राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग ने नए शिक्षा सत्र से पहले ही ग्रीष्मावकाश की तारीखों की घोषणा कर दी है. सरकारी जानकारी के अनुसार इस वर्ष राजकीय विद्यालयों में ग्रीष्मावकाश 16 मई से शुरू होकर 20 जून तक रहेगा. यानी इस साल छात्रों को लगभग 35 दिनों की गर्मी की छुट्टियां मिलेंगी. इस दौरान प्रदेश के सभी सरकारी स्कूल बंद रहेंगे और पढ़ाई का काम स्थगित रहेगा.
छुट्टियों की अवधि में किया गया बदलाव
पिछले वर्षों के मुकाबले इस बार गर्मी की छुट्टियों की अवधि में थोड़ा बदलाव किया गया है. पहले राजस्थान में ग्रीष्मावकाश 17 मई से 30 जून तक यानी लगभग 45 दिनों का होता था. लेकिन इस बार शिक्षा विभाग ने इसमें बदलाव करते हुए छुट्टियों की अवधि को कम कर दिया है. अब ग्रीष्मावकाश 16 मई से 20 जून तक यानी लगभग 35 दिन रहेगा. इस फैसले के पीछे शिक्षा विभाग का उद्देश्य पढ़ाई के दिनों की संख्या बढ़ाना बताया जा रहा है.
शिक्षण दिवसों की संख्या बढ़ाने का फैसला
राजस्थान सरकार ने इस वर्ष एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए शिक्षण दिवसों की संख्या बढ़ाकर 214 दिन कर दी है. इसका उद्देश्य छात्रों को अधिक समय तक पढ़ाई का मौका देना और शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है. शिक्षा विभाग का मानना है कि अगर छात्रों को अधिक पढ़ाई के दिन मिलेंगे तो उनकी शैक्षणिक तैयारी और बेहतर होगी. इसी कारण छुट्टियों की अवधि को थोड़ा कम किया गया है.
छात्रों और अभिभावकों के लिए राहत
हालांकि छुट्टियों की अवधि कम हुई है, लेकिन फिर भी भीषण गर्मी के समय मिलने वाली यह छुट्टी छात्रों के लिए राहत भरी खबर है. गर्मी के मौसम में कई बार स्कूल जाने के दौरान बच्चों को लू लगने या डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे में ग्रीष्मावकाश बच्चों को आराम देने के साथ-साथ उनकी सेहत की सुरक्षा के लिए भी जरूरी माना जाता है.
शिक्षा मंत्री ने की अहम बैठक
नए शिक्षा सत्र से पहले राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने जयपुर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की. यह बैठक जयपुर स्थित शिक्षा संकुल में आयोजित की गई थी. इस दौरान राज्य के विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की गई. बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के अनुरूप नए शिक्षा सत्र की तैयारियों पर विस्तार से बातचीत हुई.
नए शिक्षा सत्र पर हुई चर्चा
बैठक के दौरान यह भी तय किया गया कि प्रदेश में नया शिक्षा सत्र 1 अप्रैल से शुरू होगा. इस सत्र में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई नए कदम उठाने की योजना बनाई गई है. सरकार का उद्देश्य यह है कि स्कूलों में पढ़ाई का स्तर सुधरे और छात्रों को बेहतर शिक्षा मिले. इसी दिशा में शिक्षण दिवसों की संख्या बढ़ाने और छुट्टियों में बदलाव का निर्णय लिया गया है.
गर्मी के मौसम में सावधानी जरूरी
गर्मी के मौसम में बच्चों के लिए कुछ सावधानियां बरतना भी जरूरी होता है. विशेषज्ञों के अनुसार तेज धूप में ज्यादा समय तक रहने से डिहाइड्रेशन, लू और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए बच्चों को सलाह दी जाती है कि वे गर्मी के दिनों में ज्यादा पानी पिएं, धूप में बाहर निकलने से बचें, हल्के और सूती कपड़े पहनें, पौष्टिक भोजन करें। इन छोटी-छोटी सावधानियों से गर्मी के मौसम में स्वास्थ्य को सुरक्षित रखा जा सकता है.
ग्रीष्मावकाश का महत्व
गर्मी की छुट्टियां केवल आराम के लिए ही नहीं बल्कि बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण होती हैं. इस दौरान बच्चे अपनी रुचि के अनुसार कई गतिविधियों में हिस्सा ले सकते हैं जैसे खेलकूद, नई स्किल सीखना, किताबें पढ़ना, परिवार के साथ समय बिताना इससे बच्चों का समग्र विकास होता है.






